📖 परिचय - ब्रिटिश लोक सदन
ब्रिटेन की संसदीय शासन व्यवस्था विश्व की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। ब्रिटेन की संसद को मुख्य रूप से दो सदनों में विभाजित किया गया है— हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons) तथा हाउस ऑफ लॉर्ड्स (House of Lords)। इनमें से हाउस ऑफ कॉमन्स अर्थात् ब्रिटिश लोक सदन को अधिक शक्तिशाली एवं महत्वपूर्ण सदन माना जाता है, क्योंकि इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
यह संसद का
निर्वाचित एवं शक्तिशाली सदन माना जाता है। इस लेख में हम ब्रिटेन के लोक सदन
की शक्तियां, ब्रिटिश लोक सदन का गठन एवं संगठन, लोक सदन के अधिकार और
कार्य, तथा ब्रिटिश लोक सदन के अध्यक्ष के बारे में विस्तार
से जानेंगे।
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की संसद” जैसे विषय खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए
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🏛️ ब्रिटिश लोक सदन का संगठन एवं कार्य
लोक सदन की रचना (Composition of House of Commons) एवं संगठन को निम्नलिखित
बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है—
(1) सदस्य संख्या तथा वयस्क मताधिकार द्वारा निर्वाचन-
कॉमन्स सभा एक निर्वाचित सदन है।
वर्ष 2003-04 में निर्वाचन क्षेत्रों
की सीमाओं के पुनर्निर्धारण के पश्चात लोक सदन की कुल सदस्य संख्या 659 से घटाकर 646 निर्धारित की गई।
विभिन्न क्षेत्रों में सीटों का वितरण इस प्रकार है— ब्रिटेन-529, स्कॉटलैण्ड-59, वेल्स-40, उत्तरी आयरलैण्ड-18।
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| ब्रिटिश लोक सदन की शक्तियां, संगठन एवं कार्य |
लोक सदन के सभी सदस्य
वयस्क मताधिकार एवं प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से चुने जाते हैं। 1969 के अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष या उससे अधिक आयु
के सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है (पहले यह आयु 21 वर्ष थी)। मतदान के
अधिकार से केवल विदेशियों, अल्पसंख्यकों, पादरियों, देशद्रोहियों, कानूनी अपराधियों तथा
लॉर्ड्स सभा के सदस्यों को वंचित रखा गया है। इस प्रकार इंग्लैण्ड में प्रत्येक 18 वर्ष या उससे अधिक आयु
का नागरिक, जिसका नाम मतदाता सूची
में दर्ज हो, चुनाव में भाग ले सकता
है।
(2) निर्वाचन क्षेत्र-
वर्तमान समय में
सभी निर्वाचन क्षेत्र एकल सदस्यीय हैं। लोक सदन के प्रत्येक सदस्य द्वारा लगभग 75 हजार मतदाताओं का
प्रतिनिधित्व किया जाता है। इन चुनावों का आयोजन साधारण बहुमत प्रणाली तथा गुप्त
मतदान के माध्यम से किया जाता है।
(3) सदस्यों के लिए योग्यताएँ-
लोक सदन का सदस्य निर्वाचित होने के लिए निम्न योग्यताएँ आवश्यक हैं—
- 1. व्यक्ति ग्रेट ब्रिटेन का नागरिक होना चाहिए।
- 2. उसकी आयु कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए।
- 3. उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज होना आवश्यक है।
ब्रिटेन में यह
व्यवस्था है कि कोई भी उम्मीदवार किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है, भले ही वह उस क्षेत्र का
निवासी न हो।
इसके अतिरिक्त
कुछ व्यक्तियों को लोक सदन का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होती, जैसे— उत्तरी आयरलैंड, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड
चर्च के पादरी,
रोमन कैथोलिक
चर्च के पादरी,
स्कॉटलैंड तथा
ब्रिटेन के पियर,
सरकारी ठेकेदार, राजमुकुट के अधीन पद धारण
करने वाले व्यक्ति, शेरिफ एवं कुलीन
वर्ग के व्यक्ति आदि।
(4) लोकसदन के सदस्यों के वेतन, भत्ते आदि-
लोकसदन के सदस्यों को संसद
द्वारा निर्धारित वार्षिक वेतन एवं विभिन्न भत्ते प्रदान किए जाते हैं। इसके साथ
ही उन्हें बिना किराया रेल यात्रा की सुविधा भी प्राप्त होती है। 1965 में लोकसभा के
सदस्यों के लिए पेंशन की व्यवस्था भी की गई थी। जो सदस्य कम से कम 10 वर्ष तक लोकसदन के सदस्य
रह चुके हों, उन्हें 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने
पर पेंशन दी जाती है।
(5) कार्यकाल-
कॉमन्स सभा का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है, यदि इसे बीच में भंग न
किया जाए। इसे सम्राट प्रधानमंत्री की सलाह पर 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होने
से पहले भी भंग कर सकता है। आवश्यकता पड़ने पर इसके कार्यकाल को बढ़ाया भी
जा सकता है।
(6) अधिवेशन-
संसद का अधिवेशन
वर्ष में कम से कम एक बार अवश्य आयोजित किया जाता है। इसे बुलाने का अधिकार
ब्रिटेन के सम्राट के पास होता है। सामान्यतः अधिवेशन अक्टूबर या नवम्बर
में प्रारंभ होता है और लगभग 5 से 7 महीने तक चलता है।
कार्यवाही शुरू करने के लिए 40 सदस्यों की
गणपूर्ति (Quorum)
आवश्यक होती है।
प्रथम अधिवेशन-
चुनाव के बाद लोक
सदन का प्रथम अधिवेशन दो सप्ताह के भीतर बुलाया जाता है। इसकी बैठकें
सप्ताह में पाँच दिन होती हैं। इसी प्रथम अधिवेशन में सदन के सदस्य अध्यक्ष का चयन
करते हैं, जो सामान्यतः बहुमत दल से
होता है। इसी सत्र में सम्राट द्वारा ‘सिंहासन से भाषण’ देने की परंपरा भी है। कॉमन्स सभा का सत्र लगभग 160 दिनों तक चलता है, जिसमें 60 दिन गैर-सार्वजनिक
विषयों, 40 दिन वित्त विधेयक जैसे
वार्षिक विधेयकों तथा शेष 60 दिन अन्य
सार्वजनिक विधानों के लिए निर्धारित होते हैं।
(7) पदाधिकारी-
सदन का प्रमुख पदाधिकारी
अध्यक्ष होता है, जिसका चुनाव सदन
के सदस्य करते हैं, परंपरा के अनुसार
यह सामान्यतः बहुमत दल का व्यक्ति होता है। वह सदन की बैठकों की अध्यक्षता करता
है।
अध्यक्ष के
अतिरिक्त लोकसदन के अन्य पदाधिकारी भी होते हैं, जैसे— साधन एवं उपाय
समिति के उपसभापति तथा सदन के उपसभापति। इसके अलावा कुछ अन्य कर्मचारी, जो संसद के सदस्य नहीं
होते, जैसे लिपिक, सार्जेंट-एट-आर्म्स आदि
भी कार्य में सहयोग करते हैं।
⚖️ लोक सदन के अधिकार और कार्य
ब्रिटिश लोकसदन
के प्रमुख अधिकारों एवं कार्यों (Powers and Functions of the House of Commons) को निम्नलिखित बिंदुओं
के अंतर्गत स्पष्ट किया गया है—
(1) विधायी कार्य-
कॉमन्स सभा की विधि निर्माण संबंधी
शक्तियाँ अत्यंत व्यापक हैं। ब्रिटेन में किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार लोकसदन
को प्राप्त है। सैद्धांतिक रूप से किसी विधेयक को कानून बनने के लिए कॉमन्स सभा, लॉर्ड सभा और सम्राट की
स्वीकृति आवश्यक होती है, लेकिन वास्तविक
स्थिति में सम्राट की स्वीकृति केवल औपचारिक होती है।
लॉर्ड सभा किसी भी सामान्य विधेयक
को अधिकतम एक वर्ष तक ही विलंबित कर सकती है। इस प्रकार इंग्लैंड में विधि निर्माण
की सर्वोच्च शक्ति लोकसदन के पास होती है। सम्राट द्वारा विधेयक पर वीटो शक्ति
का प्रयोग नहीं किया जाता है, और उसके
हस्ताक्षर के बाद विधेयक अधिनियम का रूप ले लेता है।
(2) वित्तीय कार्य-
वित्तीय क्षेत्र
में लोकसदन की स्थिति अत्यंत मजबूत है। 1911 के संसदीय अधिनियम के अनुसार जिस विधेयक को लोकसदन का
अध्यक्ष वित्त विधेयक घोषित कर दे, उसे वित्त विधेयक माना जाता है। ऐसे विधेयक केवल लोकसदन
में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं, लॉर्ड सभा में नहीं।
प्रत्येक वर्ष
फरवरी में वित्त मंत्री लोकसदन के समक्ष वार्षिक आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत करता
है, जिसकी स्वीकृति के बाद
आगामी वर्ष के बजट का निर्धारण किया जाता है। लोकसदन की अनुमति के बिना न
तो कोई व्यय किया जा सकता है और न ही कोई नया कर लगाया या वसूला जा सकता है।
लोक सदन द्वारा
राजकीय वित्त पर नियंत्रण के साधन-
लोकसदन निम्न
उपायों के माध्यम से वित्तीय नियंत्रण स्थापित करता है—
(i) धन विधेयकों का प्रस्ताव- धन विधेयक केवल लोकसदन में ही प्रस्तुत किए जाते हैं, लॉर्ड सभा में नहीं।
(ii) स्वीकृति- लोकसदन की
अनुमति के बिना किसी भी मद पर सार्वजनिक धन खर्च नहीं किया जा सकता।
(iii) कर लगाने का अधिकार- बिना लोकसदन की स्वीकृति के न तो कोई नया कर लगाया जा सकता
है और न ही वसूला जा सकता है।
(iv) व्यय में परिवर्तन का अधिकार- लोकसदन को व्यय की मदों में कटौती या वृद्धि करने का
अधिकार प्राप्त है।
(v) संचित निधि पर नियंत्रण- संचित निधि से धन तभी निकाला जा सकता है जब कन्ट्रोलर जनरल
की अनुमति प्राप्त हो, जिसकी नियुक्ति
लोकसदन द्वारा की जाती है।
(vi) धन व्यय पर निगरानी- लोकसदन यह सुनिश्चित करता है कि धन का उपयोग उसी उद्देश्य
के लिए हो, जिसके लिए वह स्वीकृत
किया गया है।
(vii) धन के अपव्यय की जांच का अधिकार- ऑडिटर जनरल यह जांच करता है कि सार्वजनिक धन में कोई
अनियमितता या दुरुपयोग तो नहीं हुआ है। यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो उसकी रिपोर्ट लोकसदन
के समक्ष प्रस्तुत की जाती है।
(3) कार्यपालिका पर
नियंत्रण-
लोकसदन का एक महत्वपूर्ण कार्य
कार्यपालिका पर नियंत्रण स्थापित करना भी है। संसदीय शासन प्रणाली में मंत्रिमंडल कॉमन्स
सभा के प्रति उत्तरदायी होता है। मंत्री प्रायः लोकसदन में बहुमत दल के
सदस्य होते हैं और अपने कार्यों के लिए संसद के प्रति व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों
रूप से उत्तरदायी रहते हैं।
सभा के सदस्य
विभिन्न तरीकों से मंत्रिमंडल पर नियंत्रण रखते हैं, जैसे—
(i) प्रश्न पूछकर,
(ii) विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव प्रस्तुत करके (जैसे काम रोको
प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
आदि),
(iii) आश्वासन समिति में दर्ज मंत्रियों के वचनों के पालन की
समीक्षा कर तथा यदि आश्वासन पूरे न हों तो उस पर ध्यान आकर्षित कर।
इन सभी उपायों के
माध्यम से कार्यपालिका पर नियंत्रण स्थापित किया जाता है। किंतु व्यवहार
में दलीय अनुशासन के कारण सदस्य सामान्यतः अपनी पार्टी की नीतियों का विरोध
नहीं करते, जिससे यह नियंत्रण अधिकतर सैद्धांतिक रह जाता है और
वास्तविक शक्ति मंत्रिमंडल के हाथों में केंद्रित हो जाती है।
(4) जनता की
शिकायतों का निवारण-
लोकसदन का एक अन्य महत्वपूर्ण
कार्य जनता की शिकायतों को सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना और उनके समाधान के लिए
प्रयास करना है। सदन में जनता पर हुए अन्याय एवं अत्याचारों पर चर्चा की जाती है
और सरकार का ध्यान उनकी ओर आकर्षित किया जाता है।
इस प्रक्रिया में
मंत्रियों से प्रश्न तथा पूरक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका उत्तर देना उनके
लिए अनिवार्य होता है। इस प्रकार लोकसदन जनता और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी
के रूप में कार्य करता है।
(5) प्रजातंत्र का
रक्षक-
लोकसदन लोकतंत्र की रक्षा में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सदन में होने वाली बहसें और चर्चाएँ जनता को
राजनीतिक शिक्षा प्रदान करती हैं तथा शासन को निरंकुश होने से रोकती हैं। यह
व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा करता है और लोकतांत्रिक नेतृत्व के विकास
में सहायक होता है।
(6) प्रशिक्षण स्थल-
कॉमन्स सभा को जनता की इच्छाओं, अपेक्षाओं और भावनाओं का
प्रतिनिधि माना जाता है। संसद सदस्य निरंतर जनता की समस्याओं को सदन में उठाते हैं
और उनके समाधान के लिए प्रयास करते हैं। इस प्रकार लोकसदन जनता की शिकायतों के
निवारण का प्रमुख माध्यम बनता है।
उपरोक्त विवरण से
स्पष्ट है कि कॉमन्स सभा न केवल विधायी क्षेत्र में सर्वोच्च भूमिका
निभाती है, बल्कि कार्यपालिका पर नियंत्रण, जनता की समस्याओं के
समाधान तथा लोकतंत्र की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी करती है।
📊 लोक सदन की स्थिति का मूल्यांकन
यद्यपि
सैद्धान्तिक दृष्टि से ब्रिटेन में लोकसदन तथा संसद को सर्वोच्च
शक्ति प्राप्त है,
किंतु व्यवहार
में यह शक्ति मुख्यतः मंत्रिमंडल द्वारा प्रयोग की जाती है। मंत्रिमंडल
अपने बहुमत के आधार पर लोकसदन के समर्थन और सहयोग से विधि निर्माण तथा वित्तीय
प्रबंधन का कार्य करता है। लोकसदन का समर्थन प्रायः दलीय अनुशासन के माध्यम से
सुनिश्चित किया जाता है।
इसी प्रकार बजट
का निर्माण भी केबिनेट द्वारा किया जाता है और वित्त मंत्री के माध्यम से
उसे सदन में प्रस्तुत किया जाता है। लोकसदन सामान्यतः बजट को उसी रूप में पारित कर
देता है, जिस रूप में वह प्रस्तुत
किया जाता है। अधिकांश महत्वपूर्ण अवित्तीय विधेयक भी मंत्रिमंडल द्वारा ही तैयार
और प्रस्तावित किए जाते हैं, और कोई भी सरकारी
विधेयक तब तक पारित नहीं होता जब तक मंत्रिमंडल की सहमति प्राप्त न हो।
प्रशासनिक नीति
निर्धारण के क्षेत्र में भी लोकसदन का नियंत्रण अधिकतर औपचारिक ही माना जाता है। न्यूमैन
के अनुसार, “नीति का निर्धारण पूर्णतः
मंत्रिमंडल ही करता है, और यह संभव है
तथा प्रायः होता भी है कि उसकी घोषणा सदन के बजाय सदन में की जाए।”
इस प्रकार, लोकसदन यद्यपि बहस, चर्चा और आलोचना
का मंच अवश्य है,
लेकिन व्यवहार
में वह नीतियों को वास्तविक रूप से नियंत्रित नहीं कर पाता। उसकी भूमिका अधिकतर
अनुमोदन और समीक्षा तक ही सीमित रह जाती है, जबकि वास्तविक शक्ति मंत्रिमंडल के हाथों में
केंद्रित होती है।
❓ FAQ – ब्रिटिश लोक सदन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न
1. ब्रिटिश लोक सदन को क्या कहा जाता है?
ब्रिटिश लोक सदन
को हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons) कहा जाता है।
2. ब्रिटिश संसद के दो सदन कौन-कौन से हैं?
हाउस ऑफ कॉमन्स, हाउस ऑफ लॉर्ड्स
3. ब्रिटिश लोक सदन का कार्यकाल कितना होता है?
लोक सदन का
कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
4. लोक सदन के सदस्य कैसे चुने जाते हैं?
प्रत्यक्ष
निर्वाचन एवं वयस्क मताधिकार द्वारा।
5. ब्रिटिश लोक सदन की सबसे बड़ी शक्ति क्या है?
विधायी एवं
वित्तीय शक्ति इसकी सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है।
6. धन विधेयक कहाँ प्रस्तुत किया जाता है?
धन विधेयक केवल
लोक सदन में प्रस्तुत किया जाता है।
7. लोक सदन का अध्यक्ष कौन होता है?
लोक सदन का
अध्यक्ष स्पीकर (Speaker) कहलाता है।
8. ब्रिटेन में मतदान की आयु कितनी है?
18 वर्ष।
9. लोक सदन जनता की सहायता कैसे करता है?
जनता की शिकायतों
को सरकार तक पहुँचाकर।
10. लोक सदन को लोकतंत्र का रक्षक क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह सरकार
पर नियंत्रण रखता है और जनता के अधिकारों की रक्षा करता है।
📝 निष्कर्ष (Conclusion)
ब्रिटिश लोक सदन
अर्थात् हाउस ऑफ कॉमन्स ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण एवं
शक्तिशाली सदन है। यह न केवल कानून निर्माण करता है, बल्कि वित्तीय मामलों, कार्यपालिका पर नियंत्रण
तथा लोकतंत्र की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस प्रकार कहा जा
सकता है कि ब्रिटेन के लोक सदन की शक्तियां और महत्व आधुनिक लोकतांत्रिक शासन
व्यवस्था की आधारशिला हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी यह विषय अत्यंत
महत्वपूर्ण है।
आशा हैं कि हमारे
द्वारा दी गयी जानकारी आपको काफी पसंद आई होगी। यदि जानकारी आपको पसन्द आयी हो तो
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