📖 परिचय : ब्रिटिश लॉर्ड सभा
ब्रिटेन की संसद विश्व की सबसे पुरानी और प्रभावशाली संसदीय व्यवस्थाओं में
से एक मानी जाती है। ब्रिटिश संसद के दो सदन हैं— कॉमन सभा (House
of Commons) और House of Lords of the United Kingdom जिसे हिंदी में लॉर्ड्स
सभा, House of Peers या ब्रिटिश लॉर्ड सभा कहा जाता है।
आज के समय में “हाउस ऑफ लॉर्ड्स क्या है”, “लॉर्ड सभा की शक्तियां”, “लॉर्ड सभा की सदस्य संख्या कितनी है” तथा “ब्रिटिश लॉर्ड सभा का संगठन” जैसे विषय प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
ब्रिटिश लॉर्ड सभा को संसद का उच्च सदन माना जाता है, लेकिन समय के साथ इसकी
शक्तियाँ सीमित होती गईं। इसी कारण कई विद्वानों ने कहा है कि— “लॉर्ड सभा केवल द्वितीय
सदन ही नहीं अपितु शक्तिहीन सदन है।”
🏛️ ब्रिटिश लॉर्ड सभा का संगठन
लॉर्ड सभा की संरचना अथवा संगठन को सामान्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया
जा सकता है—
(अ) लॉर्ड सभा के सदस्य, (ब) लॉर्ड सभा के
पदाधिकारी तथा (स) गणपूर्ति एवं कार्यप्रणाली।
(अ) लॉर्ड सभा के सदस्य-
सामान्यतः लॉर्ड सभा के सदस्यों की संख्या लगभग 1000 के आसपास रहती है। 1 जनवरी, 2005 को लॉर्ड सभा के कुल सदस्यों की संख्या 707 थी, जो बाद में मार्च, 2010 तक बढ़कर 743 हो गई। वर्तमान समय में भी लॉर्ड सभा की सदस्य संख्या स्थिर नहीं रहती तथा समय-समय पर इसमें परिवर्तन होता रहता है।
हाल के वर्षों में इसकी सदस्य संख्या लगभग 800 के आसपास बनी हुई है। लॉर्ड सभा
विभिन्न प्रकार के सदस्यों से मिलकर बनी होती है और वे अलग-अलग प्रक्रियाओं के
माध्यम से इस सदन के सदस्य बनते हैं। वर्तमान समय में संवैधानिक सुधार अधिनियम, 2005 के बाद लॉर्ड सभा में मुख्यतः
तीन प्रकार के सदस्य हैं—
(1) लॉर्ड सभा के आध्यात्मिक लॉर्ड-
आध्यात्मिक लॉर्ड भी लॉर्ड सभा के सदस्य माने जाते हैं। ये पीयर नहीं बल्कि
धार्मिक गुरु होते हैं। इनकी कुल संख्या 26 होती है, जिनमें—
- 1.
कैंटरबरी के
आर्कबिशप,
- 2.
यॉर्क के
आर्कबिशप,
- 3.
लंदन के बिशप,
- 4. डरहम के बिशप तथा
- 5. विन्चेस्टर के बिशप को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाता है।
बाकी 21 सदस्य इंग्लैंड के
चर्चों के वरिष्ठ बिशप होते हैं। जब किसी धार्मिक लॉर्ड की मृत्यु या त्यागपत्र के
कारण स्थान रिक्त हो जाता है, तब अगला वरिष्ठ बिशप उसका स्थान ग्रहण कर लेता है। ये आध्यात्मिक लॉर्ड
सामान्यतः लॉर्ड सभा की कार्यवाही में बहुत कम भाग लेते हैं।
(2) वंशानुगत पीयर-
वंशानुगत पीयर लॉर्ड सभा की दूसरी श्रेणी के सदस्य होते हैं। दिसंबर, 1999 में पारित अधिनियम के
अनुसार वंशानुगत पीयरों को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है—
- 1.
प्रथम वर्ग में
वे सदस्य आते हैं जिन्हें दलीय साथियों द्वारा निर्वाचित किया जाता है,
- 2. दूसरे वर्ग में पदाधिकारी शामिल होते हैं, जिन्हें पूरा सदन चुनता है तथा
- 3. तीसरे वर्ग में राजघराने के सदस्य आते हैं।
हालाँकि वर्ष 2026 में पारित “हाउस ऑफ लॉर्ड्स
(हेरिडिटरी पीयर्स) एक्ट” के बाद वंशानुगत पीयरों के सदन में बैठने और मतदान करने के अधिकार को समाप्त
कर दिया गया है। इस प्रकार अब लॉर्ड सभा में मुख्य रूप से आजीवन पीयर और आध्यात्मिक
लॉर्ड ही रह गए हैं।
(3) आजीवन पीयर-
आजीवन पीयरों की नियुक्ति सन् 1958 के ‘लाइफ पीयरेज एक्ट’ के अंतर्गत राजा द्वारा लॉर्ड सभा के लिए की जाती है। इसके अतिरिक्त प्रायः
वरिष्ठ एवं अनुभवी नेताओं को भी नियुक्त किया जाता है। इस अधिनियम के अंतर्गत
सम्राट को महिलाओं को भी आजीवन पीयर बनाकर लॉर्ड सभा की सदस्यता देने का
अधिकार प्राप्त है। वर्तमान समय में लॉर्ड सभा में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़
रही है और हाल के आँकड़ों के अनुसार महिला सदस्यों की संख्या 250 से अधिक हो चुकी
है।
इस प्रकार नियुक्त सदस्यों को कोई वेतन नहीं दिया जाता, लेकिन उन्हें यात्रा व्यय
तथा दैनिक भत्ता अवश्य प्रदान किया जाता है। इस अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य लॉर्ड
सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधित्व को संतुलित बनाए रखना था। यदि
किसी दल का प्रतिनिधित्व असंतुलित हो जाए, तो प्रधानमंत्री अपने दल के सदस्यों को पीयर नियुक्त करवा
सकते हैं।
संवैधानिक सुधार अधिनियम, 2005 के द्वारा लॉर्ड सभा के चौथे प्रकार के सदस्य ‘लॉर्ड्स ऑफ अपील’ की व्यवस्था समाप्त कर दी
गई।
(ब) लॉर्ड सभा के पदाधिकारी-
संवैधानिक सुधार अधिनियम, 2005 के बाद अब लॉर्ड सभा की अध्यक्षता लॉर्ड चांसलर के स्थान पर ‘लॉर्ड सभा के स्पीकर’ द्वारा की जाती है। यह एक
निर्वाचित सदस्य होता है। स्पीकर को सदन में अनुशासन बनाए रखने तथा कार्यवाही को
नियंत्रित करने का अधिकार प्राप्त होता है।
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| ब्रिटिश लॉर्ड सभा का संगठन, कार्य एवं शक्तियाँ |
इसके अतिरिक्त कुछ अन्य पीयरों की भी नियुक्ति की जाती है, जो स्पीकर की अनुपस्थिति
में उसके कार्यों का संचालन करते हैं। इन्हें उपाध्यक्ष कहा जाता है। प्रथम
उपाध्यक्ष सदन की समितियों की अध्यक्षता भी करता है। सदन के स्थायी कर्मचारियों
में सदन का लिपिक,
जैन्टलमैन अशर ऑफ
द ब्लैक रॉड तथा सार्जेंट-एट-आर्म्स प्रमुख अधिकारी होते हैं।
लॉर्ड चांसलर-
संवैधानिक सुधार अधिनियम, 2005 के बाद भी लॉर्ड चांसलर का पद बना हुआ है, लेकिन अब वह केवल ब्रिटिश मंत्रिमंडल का एक सदस्य
होता है। उसकी स्थिति विधि या न्यायमंत्री के समान मानी जाती है। अब वह न तो लॉर्ड
सभा की अध्यक्षता करता है और न ही ब्रिटिश न्यायपालिका का प्रमुख होता है।
(स) लॉर्ड सभा की गणपूर्ति और कार्यप्रणाली-
लॉर्ड सभा के अधिकांश सदस्य सक्रिय रूप से कार्यवाही में भाग नहीं लेते।
सामान्यतः सदन में उपस्थिति 100 सदस्यों से अधिक नहीं पहुँचती। चूँकि गणपूर्ति केवल 3 सदस्यों से पूरी हो जाती
है, इसलिए लॉर्ड सभा की
बैठकों को स्थगित करने की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है। किसी विधेयक को पारित करने
के लिए कम-से-कम 30 सदस्यों की उपस्थिति
आवश्यक होती है।
वर्तमान समय में औसत उपस्थिति में वृद्धि की प्रवृत्ति देखी जा रही है। जो
सदस्य कार्यवाही में भाग लेते हैं, वे उच्च योग्यता तथा सार्वजनिक जीवन के अनुभवी व्यक्ति होते
हैं। लॉर्ड सभा में अधिकांश सदस्य लोकसभा के पूर्व सदस्य, भूतपूर्व प्रधानमंत्री, राजदूत, उद्योगपति आदि रहे होते
हैं। इसी कारण लॉर्ड सभा की कार्यवाही का स्तर सामान्यतः काफी उच्च माना जाता है।
लॉर्ड सभा की कार्यवाही में नियमों के पालन को लेकर लोकसभा की तुलना में कम कठोरता
दिखाई देती है। यहाँ स्थायी समितियों के समापन प्रस्ताव की व्यवस्था नहीं है। केवल
दो प्रमुख स्थायी आदेश लागू होते हैं— पहला, कोई सदस्य एक ही विषय पर दो बार भाषण नहीं दे सकता तथा दूसरा, वाद-विवाद विषय से
असंबंधित नहीं होना चाहिए।
⚡ लॉर्ड सभा के कार्य एवं शक्तियाँ
लॉर्ड सभा की शक्तियों एवं उसके कार्यों का अध्ययन निम्नलिखित शीर्षकों के
अंतर्गत किया जा सकता है—
1. व्यवस्थापन सम्बन्धी कार्य एवं शक्तियाँ-
प्रारम्भिक समय में लॉर्ड सभा की विधायी शक्तियाँ कॉमन सभा
के समान थीं, किन्तु सन् 1911 तथा 1949 के संसदीय अधिनियमों ने
लॉर्ड सभा की स्थिति को द्वितीय श्रेणी का बना दिया। अब विधेयकों के सम्बन्ध में
अंतिम निर्णय का अधिकार लोकसदन को प्राप्त है। लॉर्ड सभा किसी
विधेयक को अनिश्चित समय तक अपने पास रोककर नहीं रख सकती।
वित्त विधेयकों के मामले में लॉर्ड सभा की शक्ति और भी सीमित
है। वह किसी वित्त विधेयक को केवल एक माह तक तथा अन्य सामान्य विधेयकों को अधिकतम
एक वर्ष तक रोक सकती है। यदि लॉर्ड सभा द्वारा अस्वीकृत विधेयक को
लोकसदन पुनः पारित कर दे तथा इस बीच एक वर्ष की अवधि पूरी हो जाए, तो राजा की स्वीकृति
मिलने पर वह विधेयक कानून बन जाता है, चाहे लॉर्ड सभा ने उसे स्वीकार किया हो या
नहीं।
2. कार्यपालिका से सम्बन्धित कार्य एवं शक्तियाँ-
लोकसदन की तरह लॉर्ड सभा को भी यह अधिकार प्राप्त है कि वह प्रश्न
पूछकर सरकार से प्रशासन के विभिन्न पक्षों के विषय में जानकारी प्राप्त कर सके तथा
उसकी नीतियों और कार्यों पर खुलकर चर्चा कर सके।
जब न्यायाधीशों को उनके पद से हटाने का प्रश्न उठता है, तब लोकसदन और लॉर्ड
सभा मिलकर निर्णय लेते हैं। मंत्रिमण्डल के लगभग चार सदस्य लॉर्ड सभा
से लिए जाते हैं तथा लॉर्ड सभा का अध्यक्ष, जिसे लॉर्ड चांसलर
कहा जाता है, मंत्रिमण्डल का सदस्य होता है।
प्रत्यायोजित व्यवस्थापन के क्षेत्र में भी लॉर्ड सभा कार्यपालिका पर नियंत्रण
रखती है। इसके सदस्यों में अनेक अनुभवी विशेषज्ञ, विधिवेत्ता और विभिन्न क्षेत्रों के जानकार
व्यक्ति शामिल होते हैं, इसलिए यह कार्यपालिका द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग पर प्रभावी निगरानी रख सकती
है।
3. वित्तीय शक्तियाँ-
सन् 1911 के अधिनियम ने वित्तीय
मामलों में लॉर्ड सभा की शक्तियों को काफी सीमित कर दिया। अब सभी वित्त विधेयक
सबसे पहले लोकसदन (कॉमन सभा) में प्रस्तुत किए जाते हैं। किसी विधेयक को
वित्त विधेयक माना जाए या नहीं, इसका निर्णय लोकसदन का स्पीकर करता है।
लोकसदन से पारित होने के बाद वित्त विधेयक लॉर्ड सभा में भेजा जाता है, जहाँ उसे अधिकतम एक माह
तक रोका जा सकता है। यदि लॉर्ड सभा एक माह के भीतर विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार
करने का निर्णय नहीं लेती, तो लोकसदन उसे बिना लॉर्ड सभा की स्वीकृति के सम्राट के पास भेज सकता है। सम्राट
की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद वह विधेयक कानून बन जाता है।
4. न्याय सम्बन्धी कार्य एवं शक्तियाँ-
लॉर्ड सभा का एक महत्वपूर्ण कार्य न्यायिक प्रकृति का रहा है। यही विशेषता
उसे विश्व के अन्य द्वितीय सदनों से अलग बनाती थी। इस क्षेत्र में उसका पहला कार्य
लोकसदन द्वारा प्रस्तुत महाभियोगों की सुनवाई करना था।
दूसरा महत्वपूर्ण कार्य अपील के सर्वोच्च न्यायालय के रूप में
कार्य करना था। लॉर्ड सभा ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के मामलों में सर्वोच्च
अपीलीय न्यायालय मानी जाती थी। जब लॉर्ड सभा अपील न्यायालय के रूप
में कार्य करती थी, तब सामान्य सदस्य उसमें भाग नहीं लेते थे। उस समय केवल दस कानून लॉर्ड तथा
अन्य न्यायिक विशेषज्ञ, लॉर्ड चांसलर की अध्यक्षता में न्याय समिति के रूप में न्यायिक कार्य करते थे।
हालाँकि संवैधानिक सुधार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के बाद लॉर्ड
सभा के अधिकांश न्यायिक अधिकार समाप्त हो गए और अब ये कार्य सर्वोच्च
न्यायालय द्वारा किए जाते हैं।
पीयर बनाए जाने से सम्बन्धित विवादों पर लॉर्ड सभा द्वारा विचार
करना सन् 1948 से समाप्त हो चुका है।
इसके अतिरिक्त 1948 के फौजदारी न्याय
अधिनियम के बाद पीयरों का यह विशेषाधिकार भी समाप्त कर दिया गया कि उनके विरुद्ध
अभियोगों की सुनवाई केवल लॉर्ड सभा में ही होगी।
5. सहायक संस्था के रूप में कार्य एवं शक्तियाँ-
लॉर्ड सभा एक सहायक संस्था के रूप में भी कार्य करती है। यह कई प्रकार से कॉमन सभा के
विधायी कार्यभार को कम करने में सहायता करती है।
उदाहरण के लिए, गैर-विवादास्पद विधेयक पहले लॉर्ड सभा में प्रस्तुत किए जाते
हैं। कई बार महत्त्वपूर्ण विधेयक भी प्रारम्भ में इसी सदन में पेश किए जाते हैं।
निजी विधेयक, प्रदत्त विधान, अस्थायी आदेश, पुष्टि विधेयक तथा विशेष
प्रक्रिया आदेशों पर भी लॉर्ड सभा विचार-विमर्श करती है।
6. पुनर्विचार सम्बन्धी कार्य एवं शक्तियाँ-
लॉर्ड सभा का एक प्रमुख कार्य विधेयकों पर पुनर्विचार करना भी है। यह कॉमन सभा द्वारा
जल्दबाजी में या बिना पर्याप्त चर्चा के पारित विधेयकों की त्रुटियों की ओर ध्यान
आकर्षित करती है।
लॉर्ड सभा की उपयोगिता को ऑग और जिंक ने इन शब्दों में व्यक्त
किया है—
“ब्रिटेन में कानून
निर्माण पर वैसा कोई प्रतिबन्ध नहीं है जैसा कठोर संविधान वाले देशों में होता है।
वहाँ स्विट्जरलैंड की तरह जनमत संग्रह की व्यवस्था नहीं है और न ही संयुक्त राज्य
अमेरिका की तरह न्यायालयों द्वारा कानूनों की समीक्षा की व्यवस्था है। इसलिए
ब्रिटेन में ऐसे द्वितीय सदन की आवश्यकता अधिक है, जिसे विचार-विमर्श और पुनर्विचार की शक्ति
प्राप्त हो।”
7. विद्वतापूर्ण कार्य-
लॉर्ड सभा को विद्वता का भण्डार माना जाता है। इसके सदस्यों में अनेक वरिष्ठ राजनेता, पूर्व प्रधानमंत्री, मंत्री, सेनापति, विधिवेत्ता, धर्मशास्त्री, वित्त विशेषज्ञ तथा
श्रमिक नेता शामिल होते हैं। ऐसे अनुभवी सदस्यों के विचार सार्वजनिक विषयों पर अधिक
स्पष्ट, प्रभावशाली और उच्च स्तर
के होते हैं। वे अपनी विद्वता एवं अनुभवपूर्ण विचारों द्वारा राष्ट्र को
महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करते हैं।
📉 लॉर्ड सभा की वर्तमान स्थिति
वर्तमान समय में लॉर्ड सभा को एक शक्तिहीन सदन माना जाता है। यह न केवल
द्वितीय बल्कि गौण सदन के रूप में भी देखी जाती है। विश्व की व्यवस्थापिकाओं के
द्वितीय सदनों में इसे सबसे कमजोर सदनों में गिना जाता है।
रैम्जे म्योर के अनुसार— “अब लॉर्ड सभा केवल पुनर्विचार और पुनरीक्षण करने वाला सदन बनकर रह गई है तथा
इस कार्य के लिए भी यह संभवतः अधिक सक्षम नहीं है।”
❌ द्वितीय सदन के रूप में लॉर्ड सभा की आलोचना
कई विद्वानों और लेखकों के अनुसार लॉर्ड सभा एक अनुपयोगी तथा
हानिकारक संस्था है।
ग्रीब्ज के अनुसार लॉर्ड सभा की अनुपयोगिता के मुख्यतः तीन कारण हैं—
(1) प्रथम, व्यवहारिक रूप से अब लोकसदन स्वयं ही विधि-निर्माण के लिए दूसरे सदन का कार्य
करने लगा है। वास्तविक प्रथम सदन तो केबिनेट और प्रशासन है, जो विधेयकों का प्रारूप
तैयार करता है।
(2) द्वितीय, शासन कार्य में समय का अत्यधिक महत्व होता है, जबकि संसदीय प्रणाली में किसी प्रस्ताव पर
विचार करने में पहले से ही काफी समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में लॉर्ड सभा केवल
अनावश्यक विलम्ब उत्पन्न करती है।
(3) तृतीय, जहाँ तक विधेयकों के पुनर्विचार का प्रश्न है, यह कार्य लॉर्ड सभा जैसे विशाल सदन की अपेक्षा
कानून विशेषज्ञों और विधेयकों का प्रारूप तैयार करने वाली समितियों द्वारा अधिक
प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
ग्रीब्ज के अनुसार लॉर्ड सभा राजनीतिक दृष्टि से समय की आवश्यकताओं के अनुकूल नहीं रह
गई है। लास्की ने भी इन्हीं आधारों पर लॉर्ड सभा को अनावश्यक और
अनुपयोगी संस्था बताया है।
भूतपूर्व प्रधानमंत्री Winston Churchill के शब्दों में— “लॉर्ड सभा एक अप्रतिनिधिक, अनुत्तरदायी तथा अनुपस्थित संस्था है।”
❓ FAQ – ब्रिटिश लॉर्ड सभा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न
1. हाउस ऑफ लॉर्ड्स क्या है?
हाउस ऑफ लॉर्ड्स ब्रिटेन की संसद का उच्च सदन है।
2. लॉर्ड सभा की सदस्य संख्या कितनी है?
सदस्यों की संख्या समय-समय पर बदलती रहती है, सामान्यतः यह 700 से 1000 के बीच होती है।
3. लॉर्ड सभा को House
of Peers क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसके सदस्य पीयर (Peers) कहलाते हैं।
4. लॉर्ड सभा का मुख्य कार्य क्या है?
विधेयकों की समीक्षा और पुनर्विचार करना।
5. क्या लॉर्ड सभा वित्त विधेयक रोक सकती है?
हाँ, लेकिन केवल 1 माह तक।
6. लॉर्ड सभा में कितने आध्यात्मिक लॉर्ड होते हैं?
26 आध्यात्मिक लॉर्ड होते हैं।
7. Life Peers कौन होते हैं?
वे सदस्य जिन्हें आजीवन नियुक्त किया जाता है।
8. लॉर्ड सभा की न्यायिक शक्तियाँ कब समाप्त हुईं?
संवैधानिक सुधार अधिनियम 2005 के बाद।
9. लॉर्ड सभा को शक्तिहीन सदन क्यों कहा जाता है?
क्योंकि अंतिम विधायी शक्ति कॉमन सभा के पास होती है।
10. क्या महिलाएँ लॉर्ड सभा की सदस्य बन सकती हैं?
हाँ, 1958 के बाद महिलाओं को भी सदस्य बनाया जाने लगा।
📝 निष्कर्ष (Conclusion)
ब्रिटिश लॉर्ड सभा ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है।
यद्यपि इसकी शक्तियाँ समय के साथ कम होती गई हैं, फिर भी यह विधेयकों की
समीक्षा, पुनर्विचार तथा विशेषज्ञ सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाती है।
आज लॉर्ड सभा को एक “पुनरीक्षण सदन” के रूप में अधिक देखा
जाता है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संतुलित बनाने का प्रयास करता
है। हालांकि आलोचक इसे शक्तिहीन और अप्रासंगिक मानते हैं, फिर भी ब्रिटिश शासन
व्यवस्था में इसका ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व बना हुआ है।
आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपको काफी पसंद आई होगी। यदि जानकारी
आपको पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे।


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