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ब्रिटेन में कार्यपालिका का औपचारिक प्रधान : सम्राट और राजमुकुट

👑ब्रिटिश संविधान में सम्राट की स्थिति

📚 परिचय-

ब्रिटेन की शासन व्यवस्था (British Government System) विश्व की सबसे प्राचीन और विकसित संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary System) में से एक मानी जाती है। इस प्रणाली की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें कार्यपालिका के दो प्रधान होते हैं औपचारिक प्रधान (Nominal Head) और वास्तविक प्रधान (Real Executive)

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि ब्रिटेन में सम्राट (Monarch) और राजमुकुट (Crown) क्या होते हैं, इन दोनों में क्या अंतर है, और किस प्रकार British Constitution, Monarchy vs Democracy, Crown Powers, Succession Rules जैसे विषयों का विकास हुआ है। यह टॉपिक विशेष रूप से UPSC, SSC, PCS, Political Science और सामान्य ज्ञान (GK) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

👑 कार्यपालिका का औपचारिक प्रधान : सम्राट

ब्रिटेन में संसदीय शासन व्यवस्था है और संसदीय शासन प्रणाली की यह विशेषता होती है कि इसमें कार्यपालिका के दो प्रधान होते हैं : औपचारिक प्रधान और वास्तविक प्रधान।

देश की शासन सत्ता कार्यपालिका के वास्तविक प्रधान के हाथ में होती है, किन्तु वास्तविक प्रधान राज्य का अध्यक्ष नहीं होता। इसके विपरीत राज्य का अध्यक्ष केवल नाममात्र का ही होता है और उसके हाथ में कोई वास्तविक शक्ति नहीं होती है। इसलिए उसे कार्यपालिका का औपचारिक प्रधान कहते हैं।

ब्रिटिश संविधान में सम्राट की स्थिति, ब्रिटेन में सम्राट (Monarch) और राजमुकुट (Crown), सम्राट और राजमुकुट की अवधारणा, सम्राट के उत्तराधिकार के नियम
ब्रिटिश संविधान में सम्राट की स्थिति

सम्राट ब्रिटिश कार्यपालिका का औपचारिक प्रधान है, किन्तु उसके पास वास्तविक शक्तियाँ नहीं हैं। वास्तविक शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री और केबिनेट के द्वारा किया जाता है।

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो सम्राट केवल संवैधानिक रूप से राज्य का प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक शासन संचालन प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के हाथों में होता है। यही संसदीय प्रणाली की मूल विशेषता है।

👑 सम्राट और राजमुकुट की अवधारणा

सम्राट की भूमिका-

सम्राट वह व्यक्ति होता है जो किसी विशेष समय पर ब्रिटिश राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन होता है। यह पद राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में सर्वोच्च माना जाता है, लेकिन इसका स्वरूप अधिकतर औपचारिक होता है।

राजमुकुट का अर्थ और महत्व-

राजमुकुट राज्य की सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है, जिसे सम्राट राज्याभिषेक के समय धारण करता है। प्राचीन परंपराओं में माना जाता था कि राजमुकुट धारण करते ही सम्राट को संपूर्ण शासन शक्ति प्राप्त हो जाती थी।

उस समय सम्राट और राजमुकुट में कोई अंतर नहीं माना जाता था, लेकिन आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह भेद अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

आज ब्रिटिश संविधान को समझने के लिए सम्राट और राजमुकुट का अंतर समझना अनिवार्य माना जाता है।

ग्लैडस्टन के अनुसारअंग्रेजी संविधान में अनेक सूक्ष्म अंतर हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण अंतर सम्राट और राजमुकुट का है।

⚖️ सम्राट व राजमुकुट के भेद का महत्त्व

ब्रिटेन ने अपनी राजनीतिक यात्रा एक निरंकुश राजतंत्र के रूप में प्रारम्भ की थी, किन्तु वर्तमान में यह एक पूर्ण विकसित लोकतांत्रिक देश है। इस परिवर्तन को समझने के लिए सम्राट और राजमुकुट के बीच अंतर को समझना अत्यंत आवश्यक है।

राजतंत्र से लोकतंत्र की दिशा में हुए विकास का सरल अर्थ यह है कि पहले जो शक्तियाँ राजा (सम्राट) के पास थीं, वे अब एक संस्था (राजमुकुट) को हस्तांतरित हो गई हैं।

सैद्धान्तिक दृष्टि से ब्रिटेन में आज भी निरंकुश राजतंत्र है और राजा सब कुछ करने में समर्थ है, किन्तु व्यवहार में राजा की शक्तियों का प्रयोग स्वयं राजा द्वारा नहीं वरन् राजमुकुट द्वारा ही किया जाता है।

🏛️ राजमुकुट क्या है?

शाब्दिक रूप से राजमुकुट वह प्रतीक है जिसे सम्राट अपने राज्याभिषेक के समय पहनता है, लेकिन संवैधानिक दृष्टि से इसका अर्थ बहुत व्यापक है, आधुनिक अर्थ में राजमुकुट एक संस्था है, जिसमें शामिल हैं

·         सम्राट

·         प्रधानमंत्री

·         मंत्रिमंडल

·         संसद

·         लोक सेवाएँ

सर सिडनी लो के अनुसार यह एक सुविधाजनक क्रियाशील अवधारणाहै।

प्रो. ऑग के अनुसार यह राजा, मंत्रियों और संसद का संयुक्त रूप है।

इस प्रकार राजमुकुट वास्तव में संपूर्ण सरकार का प्रतिनिधित्व करता है और यही शासन की वास्तविक शक्ति का स्रोत है।

🔍 सम्राट और राजमुकुट में अंतर

सम्राट और राजमुकुट में कुछ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भेद हैं, जो निम्न प्रकार हैं :

(1) सम्राट एक व्यक्ति है, राजमुकुट एक संस्था-

सम्राट एक व्यक्ति होता है जो एक विशेष समय पर राजपद पर आसीन होता है। इसके विपरीत, राजमुकुट एक संस्था है, यह शासन सत्ता का प्रतीक है जिसे विधायी, प्रशासनिक और न्यायिक तीनों ही प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त हैं।

(2) सम्राट अस्थायी है, राजमुकुट स्थायी-

सम्राट व्यक्ति होने के नाते जन्म लेता है। और मरता है। मानव होने के नाते उसके साथ अन्य मानव जीवन की समस्त क्रियाएँ लगी हुई हैं उसे सिंहासनच्युत किया जा सकता है और वह स्वयं भी सिंहासन का त्याग कर सकता है।

इसके विपरीत, राजमुकुट जो एक संस्था है, न कभी जन्म ग्रहण करती है और न ही कभी उसकी मृत्यु होती है।

ब्रिटिश कानून के प्रसिद्ध व्याख्याता ब्लेकस्टोन ने इसे व्यक्त करते हुए कहा है, "हेनरी एडवर्ड तथा जार्ज की मृत्यु हो सकती है, लेकिन सम्राट सदैव ही जीवित रहते हैं।"

उनका अभिप्राय यह था कि एक विशेष समय पर सम्राट पद पर आसीन व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है, परन्तु सम्राट का पद, जिसे राजमुकुट कहा जाता है, अमर है।

इसी अभिप्राय को व्यक्त करने के लिए इंगलैण्ड में यह लोकोक्ति भी प्रसिद्ध है कि "सम्राट मृत है, सम्राट चिरंजीव हो' (Theking is dead, long live the King)

(3) सम्राट वैयक्तिक है, राजमुकुट सामूहिक-

सम्राट और राजमुकुट में एक अन्य अन्तर वैयक्तिक और सामूहिकता का है। सम्राट का रूप वैयक्तिक है, राजमुकुट की शक्तियों का प्रयोग एक व्यक्ति द्वारा न होकर अनेक व्यक्तियों द्वारा होता है। अत: राजमुकुट एक सामूहिक संस्था है तथा शक्ति का प्रयोग करने वाले इस समूह में कई अंग संसद, मंत्रिमण्डल व लोकसेवा के सदस्य सम्मिलित हैं।

(4) वास्तविक प्रशासन में सम्राट शक्तिहीन है, राजमुकुट सर्वशक्तिशाली-

भूतकाल में सम्राट वास्तविक प्रशासन में सर्वाधिक शाक्तिशाली था, किन्तु प्रजातंत्र की दिशा में संवैधानिक विकास के साथ-साथ सम्राट की शक्तियों का हास होता गया और सम्राट के हाथ से शासन की शक्ति निकलकर मंत्रिमण्डल तथा संसद को प्राप्त होती रही। वर्तमान समय में वास्तविक प्रशासन में सम्राट को कोई शक्ति प्राप्त नहीं है। किन्तु राजमुकुट एक संस्था है, जिसमें सम्राट के अतिरिक्त मंत्रिमण्डल और संसद भी सम्मिलित है, अत: व्यक्ति रूप में सम्राट के हाथ से शक्तियाँ निकलकर राजमुकुट संस्था को प्राप्त होती रही हैं और राजमुकुट सर्वशक्तिशाली है।

ब्रिटेन में प्रचलित यह कहावत है कि "जैसे-जैसे प्रजातंत्र का विकास होता है राजमुकुट की शक्ति बढ़ जाती है" (As democracy grows Crown becomes stronger) विरोधभास प्रतीत होने पर भी नितान्त सत्य है। सम्राट और राजमुकुट का भेद वास्तव में राजतंत्र और लोकतंत्र का भेद है। सम्रा राजतंत्र का प्रतीक है, राजमुकुट लोकतंत्र का प्रतीक है।

👑 सम्राट के उत्तराधिकार के नियम

सम्राट के उत्तराधिकारी के सम्बन्ध में सामान्य नियम यह है कि ज्येष्ठ पुत्र या पुत्री सिंहासन पर आसीन होते हैं। यदि किसी कारण से ऐसा संभव न हो, तो संसद उत्तराधिकारी का निर्धारण करती है।

उदाहरण के लिए, 1689 में स्टुअर्ट वंश के राजा जेम्स द्वितीय के इंग्लैण्ड छोड़ देने पर ब्रिटिश संसद ने ही विलियम और मेरी को राजा और रानी बनाया और 1701 में रानी ऐन के कोई संतान न होने के कारण संसद ने उत्तराधिकार नियम पारित कर हैनोवर वंश के राजा जार्ज प्रथम को सम्राट का पद प्रदान किया।

वर्तमान समय में सम्राट के उत्तराधिकार नियम सन् 1702 के उत्तराधिकार के नियम" (Act of Settlement) द्वारा ही निर्धारित किये जाते हैं। संसद को इन नियमों में परिवर्तन करने का अधिकार है।

💰 राजपद के वेतन और भत्ते

वर्तमान समय में सम्राट को वेतन और भत्ते प्रदान किए जाते हैं, जिन्हें सिविल सूची कहा जाता है। यह राशि संसद द्वारा निर्धारित की जाती है और कर-मुक्त होती है।

शाही परिवार के अन्य सदस्यों को भी राष्ट्रीय कोष से वार्षिक अनुदान दिया जाता है। यह पूरा व्यय राष्ट्र की संचित निधि से वहन किया जाता है। यह अनुदान संसद द्वारा संविधि के आधार पर सुनिश्चित किया जाता है तथा इन अनुदान को ही 'सिविल सूची' कहा जाता है। 'सिविल सूची' की राशि संचित निधि पर भारित होती है। अनुमान है कि ब्रिटेन में सम्राट पद पर कुल मिलाकर प्रति वर्ष लगभग 50 लाख पौण्ड व्यय होता है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न(

Q1. ब्रिटेन में वास्तविक कार्यपालिका कौन है?

उत्तर-प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल वास्तविक कार्यपालिका होते हैं।

Q2. सम्राट को औपचारिक प्रधान क्यों कहा जाता है?

उत्तर-क्योंकि उसके पास वास्तविक शासन शक्ति नहीं होती।

Q3. राजमुकुट का क्या अर्थ है?

उत्तर-राजमुकुट एक संवैधानिक संस्था है जो सम्पूर्ण शासन शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है।

Q4. सम्राट और राजमुकुट में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर-सम्राट व्यक्ति है, जबकि राजमुकुट एक संस्था है।

Q5. यह टॉपिक किन परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है?

उत्तर-UPSC, SSC, PCS, और Political Science के छात्रों के लिए।

📢 निष्कर्ष (Conclusion)

इस लेख में आपने ब्रिटेन की शासन व्यवस्था, सम्राट और राजमुकुट के बीच अंतर, उनके संवैधानिक महत्व तथा उत्तराधिकार नियमों को विस्तार से समझा। यह विषय न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बल्कि सामान्य ज्ञान और राजनीतिक समझ के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आशा हैं कि हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपको काफी पसंद आई होगी। यदि जानकारी आपको पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करे।

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