🙏 Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी 24 या 25 जून?
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी बताया गया है। यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इस दिन श्रद्धालु न केवल अन्न का त्याग करते हैं बल्कि जल भी ग्रहण नहीं करते।
निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। मान्यता है कि इस एक व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इसलिए इसे भीम एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है।
इस लेख में हम जानेंगे: Nirjala Ekadashi 2026 कब है, निर्जला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त, निर्जला एकादशी व्रत कथा, पूजा विधि, व्रत पारण नियम, और इसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व क्या है।
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| Nirjala Ekadashi 2026 शुभ मुहूर्त, महत्व और पारण नियम |
📌 निर्जला एकादशी 2026 : एक नजर में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| व्रत का नाम | निर्जला एकादशी |
| अन्य नाम | भीम एकादशी, पांडव एकादशी |
| तिथि | ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी (जून 2026) |
| देवता | भगवान विष्णु |
| व्रत का प्रकार | निर्जल (बिना अन्न और जल) |
| मुख्य उद्देश्य | सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त करना |
🌿 निर्जला एकादशी 2026 कब है?
निर्जला एकादशी हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत जून माह में रखा जाएगा। चंद्र कैलेंडर के अनुसार तिथि बदल सकती है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से सटीक तिथि और पारण समय अवश्य जांच लें।
यह एकादशी ग्रीष्म ऋतु में आती है, इसलिए इसे रखना कठिन माना जाता है। फिर भी श्रद्धालु पूरी भक्ति और नियम से यह व्रत करते हैं।
⏰ निर्जला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून 2026, शाम 06:12 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, रात 08:09 बजे
- हरि वासर समाप्त: 26 जून 2026, सुबह 05:47 बजे
- पारण का समय: 26 जून 2026, सुबह 05:47 बजे से 08:28 बजे तक (द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद)
ध्यान रखें कि पारण सही समय पर करना अत्यंत आवश्यक है। निर्धारित समय के भीतर व्रत खोलने से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
📖 निर्जला एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में से भीमसेन अत्यधिक भोजन करते थे और उन्हें बहुत भूख लगती थी। वे अन्य भाइयों की तरह सभी एकादशी व्रत नहीं रख पाते थे।
एक दिन उन्होंने महर्षि व्यास से पूछा — “मैं सभी एकादशी व्रत नहीं रख सकता, तो क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे मुझे सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सके?”
महर्षि व्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत निर्जल रहकर करने की सलाह दी। उन्होंने कहा —
“यदि तुम इस एक दिन अन्न और जल का पूर्ण त्याग कर श्रद्धा से व्रत करोगे, तो तुम्हें वर्ष की सभी एकादशियों का पुण्य मिलेगा।”
भीमसेन ने कठोर संकल्प लिया और पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखा। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
तभी से यह एकादशी “भीम एकादशी” या “निर्जला एकादशी” कहलाने लगी।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि इस व्रत से —
- पापों का नाश होता है
- यमदूतों का भय समाप्त होता है
- मोक्ष की प्राप्ति होती है
🪔 निर्जला एकादशी व्रत विधि
1️⃣ दशमी से तैयारी
- दशमी के दिन सात्विक भोजन करें
- लहसुन, प्याज, मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करें।
2️⃣ एकादशी के दिन की पूजा विधि
सुबह की तैयारी
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- स्वच्छ या पीले वस्त्र पहनें
पूजा प्रक्रिया
- पूजा स्थान की सफाई करें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।
- तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
- व्रत का संकल्प लें।
मंत्र जाप
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- गीता पाठ या भजन करें।
3️⃣ व्रत के नियम
- अन्न और जल का पूर्ण त्याग
- क्रोध और विवाद से दूर रहें
- दिन भर भजन-कीर्तन करें
- मन को शांत और एकाग्र रखें।
🌼 पूजा सामग्री
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
- तुलसी दल
- धूप, दीप
- पीले फूल
- पंचामृत
- नैवेद्य (फल, मिष्ठान)
- जल से भरा कलश
- पंचामृत
⭐ निर्जला एकादशी का महत्व
1️⃣ सभी एकादशियों का फल
जो व्यक्ति वर्ष भर 24 एकादशी व्रत नहीं कर सकता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी का फल प्राप्त कर सकता है।
2️⃣ पापों से मुक्ति
इस व्रत से पूर्व जन्म और वर्तमान जन्म के पापों का नाश होता है।
3️⃣ मोक्ष की प्राप्ति
धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि यह व्रत मोक्षदायक है।
4️⃣ आध्यात्मिक लाभ
- आत्मसंयम बढ़ता है
- मन की शुद्धि होती है
- सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
5️⃣ स्वास्थ्य लाभ (आध्यात्मिक दृष्टि से)
उपवास शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक माना जाता है, हालांकि निर्जल व्रत कठिन होता है और सावधानी आवश्यक है।
🙏 व्रत पारण की विधि
द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
पारण कैसे करें?
- स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को जल, फल या वस्त्र दान दें
- सबसे पहले जल ग्रहण करें
- फिर सात्विक भोजन लें
🔔 पारण का समय पंचांग के अनुसार ही रखें।
⚠️ निर्जला एकादशी में सावधानियां
- गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग डॉक्टर की सलाह लें
- यदि पूर्ण निर्जल व्रत संभव न हो तो जल या फलाहार ले सकते हैं।
- अत्यधिक गर्मी में सावधानी रखें
- यदि कमजोरी लगे तो व्रत तोड़ दें, स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें
धर्म में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है।
❓ Nirjala Ekadashi 2026 – FAQ
- क्या पानी पी सकते हैं? परंपरागत रूप से नहीं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से जल ले सकते हैं।
- क्या महिलाएं व्रत रख सकती हैं? हां, श्रद्धा अनुसार रख सकती हैं।
- यह व्रत इतना विशेष क्यों है? क्योंकि यह सभी एकादशियों का फल देता है।
- पारण कब करें? द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद।
🏵 आध्यात्मिक संदेश
निर्जला एकादशी केवल उपवास नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, भक्ति और विश्वास का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि जीवन में संयम और श्रद्धा का कितना महत्व है।
व्रत के माध्यम से हम न केवल शरीर को अनुशासित करते हैं, बल्कि मन और आत्मा को भी शुद्ध करते हैं।
🏁 निष्कर्ष
निर्जला एकादशी 2026 आस्था, तपस्या और भक्ति का पर्व है। यह व्रत हमें आत्मसंयम, श्रद्धा और अनुशासन का महत्व सिखाता है।
यदि आप यह व्रत रखने का विचार कर रहे हैं, तो पूरी विधि और सही पारण समय का पालन करें। भगवान विष्णु की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।
🙏 “इस निर्जला एकादशी पर श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।”


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