📅 परमा एकादशी 2026: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
परमा एकादशी 2026 : जानिए तिथि, पूजा-विधि, धार्मिक महत्व और दान का पुण्यफल, 10 या 11 जून कब है अधिक मास की परमा एकादशी, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व, parama ekadashi 2026 in hindi और इसका सम्पूर्ण महत्व क्या है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रतों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इन्हीं में से एक विशेष व्रत है परमा एकादशी, जो अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में आती है। वर्ष 2026 में यह एकादशी भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जा रही है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होकर मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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| परमा एकादशी 2026 |
📌 परमा एकादशी 2026 कब मनाई जाती है?
परमा एकादशी अधिक मास में आने वाली विशेष एकादशी है, इसलिए इसकी तिथि सामान्य एकादशी से अलग मानी जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 11 जून 2026 को प्रातः 12 बजकर 57 मिनट पर होगा तथा इसका समापन उसी दिन रात्रि 10 बजकर 36 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 जून 2026 को प्रातः 12 बजकर 57 मिनट पर
- एकादशी तिथि समाप्त: 11 जून 2026 रात्रि 10 बजकर 36 मिनट पर
- व्रत रखने की प्रमुख तिथि: 11 जून 2026 (उदया तिथि के अनुसार)
👉 हालांकि सही मुहूर्त और तिथि स्थानीय पंचांग के अनुसार ही निश्चित करनी चाहिए।
🪔 परमा एकादशी क्यों मनाई जाती है?
- यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है
- अधिक मास को स्वयं भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है
- इस दिन व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है
- आत्मा की शुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग आसान होता है
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया व्रत हजारों यज्ञों के समान फल देता है।
⏳ परमा एकादशी कब और कैसे मनाई जाती है?
परमा एकादशी का व्रत पूरे श्रद्धा भाव से एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है।
🧘 व्रत की प्रक्रिया:
- एकादशी से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें
- व्रत वाले दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें
- दिनभर उपवास रखें (निर्जल या फलाहार)
- रात में भजन-कीर्तन करें
- अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें
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🌿 परमा एकादशी की पूजा-विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- भगवान विष्णु का ध्यान करें
- पूजा स्थल पर दीप जलाएं
- तुलसी पत्र, पीले फूल और पीले वस्त्र अर्पित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
- दिनभर व्रत और भक्ति में समय बिताएं
🌺 परमा एकादशी का धार्मिक महत्व
- सभी प्रकार के पापों का नाश होता है
- जीवन में सुख-समृद्धि आती है
- मन और आत्मा शुद्ध होती है
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
💛 दान का पुण्यफल
परमा एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व है।
- अन्न दान
- वस्त्र दान
- गरीबों को भोजन
- तिल, गुड़ और घी का दान
- ब्राह्मणों को दक्षिणा
👉 मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और जीवन की बाधाओं को दूर करता है।
✨ परमा एकादशी का सम्पूर्ण महत्व क्या है
परमा एकादशी का सम्पूर्ण महत्व यह है कि यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि का माध्यम है। यह व्यक्ति को अहंकार, पाप और नकारात्मक विचारों से मुक्त करके भक्ति मार्ग की ओर ले जाता है। अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह समय स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित होता है।
🏁 निष्कर्ष
परमा एकादशी 2026 एक अत्यंत पावन और पुण्यदायी व्रत है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। यह दिन हमें भक्ति, संयम और दान के महत्व को समझाता है। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से इस व्रत का पालन करता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।


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